नीट और जिप्मेर परीक्षा परिणामों के पश्चात एम्स एमबीबीएस 2019 का परीक्षा परिणाम 12 जून  को संभावित

एम्स एमबीबीएस- 2019

… परिणाम नॉर्मलाइज्ड परसेंटाइल के आधार पर ।। दशमलव के 7 अंकों तक ज्ञात किया जाएगा नोर्मलाइज्ड परसेंटाइल।।

देश की प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा एम्स एमबीबीएस-2019 का 25 एवं 26 मई 2019 को प्रत्येक दिन दो शिप्टों में आयोजन किया गया था।
कैरियर पॉइंट के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट देव शर्मा ने बताया कि देश में एमबीबीएस तथा बीडीएस सीटों पर प्रवेश के लिए नीट,एम्स तथा जिपमेर का आयोजन किया जाता है। तीनों ही परीक्षाओं का आयोजन समाप्त हो चुका है तथा नीट 2019 तथा जिप्मेर 2019 का परीक्षा परिणाम भी जारी किया जा चुका है।
एम्स प्रशासन द्वारा जारी इंफॉर्मेशन बुलेटिन के अनुसार एम्स एमबीबीएस 2019  के परीक्षा परिणाम की संभावित तारीख कल बुधवार 12 जून 2019 है।
ज्ञात रहे कि यह ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा   विभिन्न शिफ्टों में आयोजित की जाती है। प्रत्येक शिफ्ट के लिए भिन्न-भिन्न प्रश्न पत्रों का उपयोग किया जाता है। भिन्न-भिन्न शिफ्टों में उपस्थित विद्यार्थियों की संख्या भी भिन्न होती है। अतः परीक्षा परिणाम के लिए प्रतिशत के स्थान पर नॉर्मालाइज्ड परसेंटाइल का उपयोग किया जाता है।
देव शर्मा ने बताया कि नोर्मालाइज्ड परसेंटाइल की गणना दशमलव के सात अंको तक की जाती है ताकि परीक्षा परिणाम सटीकता से जारी किए जा सके।

…रैंक लिस्ट का निर्माण नोरमलाइज्ड परसेंटाइल के आधार पर ।। कट ऑफ परसेंटाइल 50%  सामान्य वर्ग के लिए, 45% ओबीसी एनसीएल के लिए, 40% एससी-एसटी वर्ग के लिए।।

…टाई की स्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता बायोलॉजी को, अंतिम प्राथमिकता उम्र को ।।

देव शर्मा ने बताया कि रैंक लिस्ट का निर्माण नॉर्मलाइज्ड परसेंटाइल के अवरोही क्रम में किया जाता है। प्रथम रैंक वाले विद्यार्थी का नॉर्मलाइज्ड परसेंटाइल 100 परसेंटाइल होता है।
देव शर्मा ने स्पष्ट किया कि टाइ होने की स्थिति में
अर्थात सामान नॉर्मलाइज्ड परसेंटाइल होने की स्थिति में बायोलॉजी में अधिक परसेंटाइल वाले विद्यार्थी को प्राथमिकता दी जाती है। यदि बायोलॉजी का परसेंटाइल भी समान है तो फिर केमिस्ट्री के परसेंटाइल को प्राथमिकता दी जाती है। यदि फिर भी टाइ होता है तो फिर फिजिक्स को प्राथमिकता दी जाती है।
बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स तीनों ही विषयों में टाइ की स्थिति होने पर सामान्य ज्ञान को प्राथमिकता दी जाती है।
और इन सब परिस्थितियों में भी यदि टाइ रहता है तो फिर अधिक उम्र वाले विद्यार्थी को प्राथमिकता देकर परिणाम घोषित किया जाता है।
देव शर्मा ने बताया कि कॉमन मेरिट लिस्ट में शामिल होने के लिए सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को न्यूनतम 50% नॉरमलाईज्ड  परसेंटाइल की आवश्यकता होगी। ओबीसी एनसीएल वर्ग के लिए 45% तथा एससी एसटी वर्ग के लिए यह 40% है।

कुल उपलब्ध 1207 सीटों में से 07 विदेशी विद्यार्थियों के लिए ।। भारतीय विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध 1200 सीटों का आवंटन किया जाएगा एम्स 2019 के परीक्षा परिणाम के आधार पर ।।

…15 एम्स में से 8 की कक्षाएं अस्थाई कैंपस में ।। मंगलगिरी, नागपुर, बठिंडा, देवगढ़, गोरखपुर, कल्याणी, रायबरेली तथा तेलंगाना के पास स्थाई केंपस नहीं ।।

देव शर्मा ने बताया कि वर्ष 2018 में एम्स की संख्या 9 थी तथा भारतीय छात्रों के लिए उपलब्ध एमबीबीएस सीटों की संख्या 800 थी। दिल्ली एम्स की 7 सीटें विदेशी छात्रों के लिए आरक्षित थी।
वर्ष 2019 में एम्स की संख्या 15 हो गई है तथा भारतीय छात्रों के लिए उपलब्ध एमबीबीएस सीटों की संख्या 1200 है। देव शर्मा ने बताया कि आश्चर्यजनक किंतु सत्य है कि 15 में से 8 एम्स  के पास स्वयं का स्थाई केंपस नहीं है। टीचिंग स्टाफ की उपलब्धता पर भी प्रश्न चिन्ह है। यही कारण है कि विद्यार्थी हाल ही में खुले नए एम्स में प्रवेश लेने से कतराते हैं। यही कारण है कि प्रवेश हेतु केंद्रीकृत काउंसलिंग के तीन राउंड समाप्त होने के पश्चात भी खाली सीटों के लिए ओपन राउंड आयोजित किया जाता है।
देव शर्मा ने बताया कि संभावित 12 जून 2019 को परिणाम जारी होने के पश्चात केंद्रीकृत ऑनलाइन काउंसलिंग की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।

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