दीवानी प्रक्रिया संहिता के ज्ञान के बिना प्रभावी पैरवी मुश्किल

-सीपीयू के लॉ स्टूडेंट्स ने जानी सिविल प्रकरणों से संबंधित विस्तृत प्रक्रिया

कोटा, 24 नवम्बर। कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट की ओर से शनिवार को डकनिया रोड स्थित सीपी टॉवर परिसर के सभागार में सिविल वादों से संबंधित प्रक्रिया विषय पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। लॉ स्टूडेंट को सिविल प्रक्रिया का प्रेक्टिकल ज्ञान देने के लिए हुई इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता महेश चंद्र गुप्ता व वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक नंदवाना ने भी कई अहम जानकारियां साझा की। उन्होंने केस दायर करते समय कोर्ट के क्षेत्राधिकार, कोर्ट फीस, प्री-लिटिगेशन, मध्यस्थता, विवाधक तय करने, शपथ पत्र साक्ष्य लेने, निर्णय व डिक्री तक की संपूर्ण प्रक्रिया को सहजता से समझाया। वरिष्ठ अधिवक्ता महेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि दीवानी प्रक्रिया संहिता के ज्ञान के बिना प्रभावी वकालत मुश्किल भरा काम है। उन्होंने कहा कि सिविल मामलों में वाद दायर करने से पहले परिवादी की समस्या को अच्छी तरह समझे उसके बाद ही संबंधित न्यायालय में निर्धारित कोर्ट फीस के साथ वाद दायर करें। जानकारी के अभाव में कई बार परिवादी को नुकसान भी उठाना पड़ जाता है। एडवोकेट विवेक नंदवाना ने कहा कि लॉ स्टूडेंट को समय के साथ अपडेट रहने की जरूरत है। वो पढ़ने व लिखने की जिज्ञासा बढ़ाए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले हर रोज पढ़े। एडवोकेट नंदवाना ने सिविल वाद दायर करने के दौरान अदालती प्रक्रिया को विस्तृत तरीके से समझाया। कुलपति प्रो. सुमेर सिंह ने कहा कि कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत लॉ स्टूडेंट वकालत के पेश में ईमानदारी के साथ देश में बड़ा नाम कमाए इसके लिए पुरजोर प्रयास जारी है। कार्यक्रम की शुरूआत सीपीयू के कुलपति प्रो. सुमेर सिंह, अकादमिक निदेशक डॉ. गुरूदत्त कक्कड़, लॉ डिपार्टमेंट की डीन डॉ. नीतु नुवाल ने अतिथियों को गुलदस्ता भेंट कर की। कार्यशाला में लॉ डिपोर्टमेंट की डीन डॉ. नीतू नुवाल, फैकल्टी शैलेष शर्मा, मानसी शर्मा, मिथलेश मालवीय सहित लॉ स्टूडेंट्स मौजूद थे। कार्यशाला में लॉ स्टूडेंट्स ने कई सवाल भी पूछे जिनका वक्ताओं ने संतोषप्रद जवाब भी दिया। डॉ. नीतू नुवाल ने आभार व्यक्त किया।

राजस्थान में 3.99 लाख से ज्यादा सिविल केस पेंडिंग

कार्यशाला में परिचयात्मक टिप्पणी के दौरान फैकल्टी कुनाल रोहिड़ा ने कहा कि वर्तमान में देश में 83 लाख से अधिक व राजस्थान में 3 लाख 99 हजार से अधिक व कोटा में करीब 18 हजार सिविल केस अदालतों में पेंडिंग पड़े हुए है। देशभर में 5 लाख 26 हजार से अधिक कैसे तो ऐसे है जो गत 10 वर्ष से पेंडिंग है। इनके जल्द निपटारे के लिए ठोस प्रयास की जरूरत है। नई पीढ़ी के लिए वकालत के पेश में बड़ा विकल्प नजर आता है।

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