सूचना प्रौद्योगिकी चुनौतियों के साथ पुस्तकालय विज्ञान में नवाचार आवश्यक

-कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न

कोटा, 15 नवम्बर। सूचना प्रौद्योगिकी से जहा पुस्तकालय विज्ञान लाभांवित हुआ है, वहीं पुस्तकालय के पठन, पाठन एवं संप्रेषण को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए कई नई चुनौतियां भी सामने है। विगत कुछ वर्षो में भारत में इस संबंध में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन भी हुए है, बावजूद अब भी बहुत कुछ गुंजाइश बाकी है। यह कहना है दिल्ली विश्वविद्यालय के पुस्तकालय विज्ञान संकाय के प्रोफेसर हरीश गोयल का।  वे गुरूवार को झालावाड़ रोड पर आलनिया स्थित कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी के पुस्तकालय विज्ञान संकाय द्वारा आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब महत्वपूर्ण यह है कि सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा प्रदत्त सुविधाओं को हम सुवधा के रूप में अंगिकार करते है अथवा बाधा मानकर अस्वीकार करते है। समय की जरूरत यह है कि इसे स्वीकार किया जाए एवं पुस्तकालय विज्ञान से संबंधित व्यक्तियों को इसके साथ और मित्रवत बनाया जाए, ताकि पुस्तकालय के कार्य एवं सुविधाओं को ओर सहज व सुखकर बनाया जा सकें।
प्रॉब्लम एण्ड प्रोस्पेक्ट ऑफ इंटरवेशन ऑफ इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी इन लाइब्रेरी साइंस इन इंटरनेशनल प्रस्पेक्टीव विषय पर हुई इस कार्यशाला में दक्षिण अफ्रीका के तंजानिया, इजराइल सहित कई देशों के प्रतिभागियों ने भाग लिया और अपने विचार साझा किए।
सीपीयू के कुलपति प्रो. सुमेर सिंह ने कहा कि कार्यशाला का विषय सम सामयिक है ओर इस विषय पर गहन चिंतन एवं मनन की आवश्यकता है। यह चिंतन न केवल अकादमिक लाइब्रेरी बल्कि संपूर्ण पुस्तकालय विज्ञान को नई दिशा देगा। कार्यशाला में दक्षिण अफ्रीका स्थित अहयदू बेलू विश्वविद्यालय के प्रतिभागी डॉ. माईकल ईशू ने डिजीटलाइजेशन एवं इंस्टीट्यशनेशनल रिपोसटरी से संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए सुझाव दिए। बॅयरो विश्वविद्यालय, कांगो (अफ्रीका) के प्रतिभागी डॉ. सूनूसी हुसैनी ने कहा कि इतने वर्षो बाद भी सूचना प्रौद्योगिकी, पुस्तकालय विज्ञान में अपनी स्वीकार्यर्ता स्थापित नहीं कर पाई है। आज भी पुस्तकालय विज्ञान के प्रोफेशनल पारंपरिक तरीके से कार्य करने में स्वयं को अधिक सहज महसूस करते है। इस मौके पर कोटा डिवीजन लाइब्रेरी के प्रमुख डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने हांगकांग स्थित नेशनल लाइब्रेरी के अपने अनुभव भी विस्तृत रूप से साझा किए। उन्होंने कहा कि जब हांगकांग सूचना प्रौद्योगिकी के नवाचार कर पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी हो सकता है तो अन्य राष्ट्र ऐसा क्यों नहीं कर रहे? महत्वपूर्ण यह है कि पुस्तकालय की महत्ता को समझा जाए एवं इसे प्राथमिकता दी जाए। इसमें सरकारों की इच्छा शक्ति का ही सकारात्मक योगदान होगा। कार्यशाला में सीपीयू के अकादमिक निदेशक डॉ. गुरूदत्त कक्कड़ के अलावा डॉ. सुलेमान सांबू, नसीरू मादूूबू, राकिया ईसा, बुहारी अब्दुल रहीम सहित इस अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों ने भाग लिया। अंत में कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी के डीन (रीसर्च एंड हायर स्ट्डीज) डॉ. के.एम. शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

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