सीपीयू स्टूडेंट्स ने उम्मेदगंज पंक्षी विहार में देखी भारतीय प्रवासी पक्षियों की अटखेलियां

– इस बार एक महीने पहले ही आ गए हिमालय के ब्लैक काइट इगल पक्षी

कोटा, 5 अक्टूबर। कोटा शहर के उम्मेदगंज पक्षी विहार सहित आसपास के जलाशयों में हिमालय से आने वाले ब्लैक काइट इगल पक्षियों का इस बार एक माह पहले ही आगमन हो गया है। ऐसे में इन जलाशयों में विचरण करने वाले बगूलों सहित छोटे पक्षियों का यहां कलरव कम हो गया और ये छोटे पक्षी अन्य जलाशयों की तरफ पलायन कर गए हैं।
64 वें वन्य जीव सप्ताह के तहत शनिवार को उम्मेदगंज पक्षी विहार पहंुचे कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी (सीपीयू) के स्कूल ऑफ बेसिक एप्लाइड साइंस के एमएससी(जूलॉजी व बॉटनी) के स्टूडेंट्स ने हिमालय के यह पक्षी बड़ी संख्या में देखे।

सीपीयू के साइंस विभाग की डीन डॉ. मंजुल मिश्रा ने बताया कि उम्मेदगंज गए स्टूडेंट्स टीम को पर्यावरण व पक्षी प्रेमी एएच जैदी ने कई अहमद जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिमालय व अन्य बर्फीले इलाकों से हर साल अक्टूबर माह तक ब्लैक काइट इगल पक्षियों का झुंड कोटा सहित राजस्थान के अन्य इलाकों में आता है। लेकिन इस बार सितम्बर माह में ही यह भारतीय प्रवासी पक्षी यहां आ गए। अब ये पक्षी यहां पर 6 माह तक डेरा डाले रहेंगे, फिर लौटेंगे।
एएच जैदी ने बताया कि ब्लैक काइट इगल मांसाहारी है और यह छोटे पक्षियों व जलीय जीवों का आसानी से शिकार कर लेते है। ऐसे में उम्मेदगंज सहित अन्य जलाशयों में अक्सर शाम के समय देसी पक्षियों का कलरव अब कम हो गया है। पर्यावरण की दृष्टि से हिमालय के यह पक्षी फायदेमंद है। किशोरसागर में डलने वाले मांस के अवशेष यह पक्षी खाते है ऐेसे में जल प्रदूषण से राहत भी मिलती है। लेकिन कई बार यह शिकारी पक्षी छोटे पक्षियों को भी अपना शिकार बना लेते है। ऐसे में स्थानीय पक्षी अन्य जलाशयों की तरफ पलायन कर जाते है।

खेत में नजर आया सारस का जोड़ा

उम्मेदगंज तालाब से पहले एक खेत में विचरण करता सारस

सीपीयू के साइंस विभाग में जूलॉजी की सहायक प्रोफेसर मीनाक्षी शर्मा एवं डॉ. अनुपमा जैन ने बताया कि उम्मेदगंज तालाब से पहले एक खेत में सारस का एक जोड़ा भी दिखा। यह जोड़ा अपने बच्चे के साथ नजर आया। स्टूडेंट्स ने खेत में बै

ठे इस पक्षी जोड़े को अपने कैमरे में भी कैद किया। इस क्षेत्र में सारस के दो जोड़े अक्सर देखे जाते है।

स्टूडेंटस ने जानी बर्ड वॉचिंग तकनीक

उम्मेदगंज पहंुचे सीपीयू के स्कूल ऑफ बेसिक एप्लाइड साइंस के एमएससी(जूलॉजी व बॉटनी) के स्टूडेंट्स को सहायक वन संरक्षक अनुराग भटनागर, पक्षी प्रेमी एएच जैदी व आरएस तोमर ने बर्ड-चिंग की तकनीक के अलावा भारतीय प्रवासी पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के बारें में विस्तृत जानकारी दी।

उम्मेदगंज का इतिहास जाना

कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को विशेषज्ञों ने उम्मेदगंज की ऐतिहासिक जानकारी देते हुए बताया कि कोटा रियासत के पूर्व महाराव उम्मेदसिंह प्रथम ने इस गांव को बसाया था और तब यहां पर कोटा रियासत में चलने वाली मुद्रा (सिक्कों) की टकसाल हुआ करती थी। यहां पर एक पिंजरे में शेर रहते थे। आज भी यहां पर रियासतकालीन मंदिरों, बावड़ियों में प्राचीन कलाकृतियों के नमूने देखने को मिलते है।

उम्मेदगंज में इन पक्षियों की दिखी अठखेलियां

हाउस स्विफ्ट, ग्रेट, ई-ग्रेट, एशियन ओपन बिल स्टोर्क, ब्लैकविंग स्टील्ड, परपल हेरोन, रोज रिंग पेराकीट, मेल कॉम्ब डक, रिबर्टन, व्हाइट वेगटेल, लेसर विसलिंग डक, स्पॉटेड ओवलेट, 

व्हाइट थ्रोटेड किंग फिशर, पेटेंट स्टॉर्क, लिटिल कोरमोरेंट, ई-ग्रेड सहित कई भारतीय प्रवासी व स्थानीय पक्षियों की प्रजातियां दिखी। तालाब में एक मगरमच्छ भी नजर आया।

 

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