स्वयं में बदलाव से हो सकता है बेहतर सुधारः जस्टिस भंडारी

– भारत में किशोर न्याय प्रणाली पर पुनर्विचार, वर्तमान स्थिति व चुनौतियां विषय पर कॅरिअर पॉइंट में नेशनल सेमिनार सम्पन्न

जस्टिस मुनिश्वर नाथ भंडारी, राजस्थान हाईकोर्ट

कोटा, 12 मई। राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस मुनिश्वर नाथ भंडारी ने कहा कि कानून तो अपने दायरें में रहकर काम करता ही है, लेकिन हर नागरिक को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। बाल अपराध रोकने के लिए बच्चों को पॉजीटिव माहौल दें। जो बच्चे अनाथालय या चाइल्ड हॉम में रहते है उनके साथ समय बिताएं। अपना जन्म दिन मनाएं, ताकि वो भी खुशियों के पल महसूस करें और अपराध का रास्ता छोड़ कर समाज की मुख्यधारा से जुड़े।
जस्टिस भंडारी शनिवार को कोटा में कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी कोटा व राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में डकनिया रोड स्थित सीपी टावर परिसर स्थित सभागार में ”भारत में किशोर न्याय प्रणाली पर पुर्नविचार एवं वर्तमान स्थिति व चुनौतियां” विषय पर आयोजित नेशनल सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। जस्टिस भंडारी ने कहा कि बाल अधिकारों को लेकर बने कानून के सभी पहलुओं को देखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी कोटा ने इस विषय को उठाया जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि हर किशोर को न्याय मिले ऐसी संविधान की मंशा है। जब भी कोई सरकार कानून बनाती है तो उसके फायदें भी होते है। हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा हो और उसे कानूनी सहायता मिले इसके लिए हम प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि निर्भया केस ने सभी को झकझौंर कर रख दिया। बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए हम संकल्पित है। बच्चों को उनके अधिकार मिले और हर स्तर पर उनका विकास हो। चुनौतियां हर काम में आती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि चुनौतियों से घबराकर काम करना बंद कर दें। आज समाज में मानवीय मूल्यों के विकास की जरूरत है। 10 से 11 वर्ष की उम्र के बच्चों का क्राइम में लिप्त होना चिंतन का विषय है। अभिभावकों को भी बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों को पॉजीटिव माहौल दें। सुधार तब ही हो सकता है जब हमारी मानसिकता में बदलाव हो और सुधार की पहल स्वयं से हो। उन्होंने कहा कि आज चिल्ड्रन हॉम व चिल्ड्रन ऑब्जर्वेशन हॉम की जरूरत है इसके लिए कॉर्पोरेट संस्थाएं आगे आए। अध्यक्षता कर रहे जिला न्यायाधीश एवं राजस्थान स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के मेम्बर एस.के. जैन ने कहा कि लावारिस बच्चों की देखभाल हम सब की जिम्मेदारी है। चाइल्ड लाइन व हेल्पलाइन बनी हुई है जहां बच्चों को कानूनन सुरक्षा मुहैया करवाई जा रही है। हम सब का नैतिक दायित्व है कि बच्चों के हितों के लिए काम करें। जेजे बोर्ड अपना काम कर रहा है। बाल अपराध से जुड़ी खबरों पर तुरंत एक्शन हो और पीड़ित को मदद मिले। कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। सीपीयू के विधि अनुभाग की एचओडी शैलेष शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रमोद माहेश्वरी ने अतिथियों ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। इस मौके पर अतिथियों ने सीपीयू की सोविनियर बुक का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. नीतू नुवाल ने भी विचार व्यक्त किए। कॅरिअर पॉइंट के अकादमिक निदेशक गुरूदत्त कक्कड़, सहायक प्रोफेसर कुनाल सहित समाजसेवी संस्थाए, अभिभाषकगण, लॉ स्टूडेंट आदि मौजूद थे।


हर बच्चा देश का भविष्यः प्रो. मधु शास्त्री

विशिष्ट अतिथि राजस्थान यूनिवर्सिटी की सेवानिवृत प्रो. मधु शास्त्री ने कहा कि हमें समाज के बारें में सोचना होगा। बेटियां आज घरों में भी सुरक्षित नहीं है। अपने ही रिश्तों को तार-तार कर रहे है। बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं स्लोग्न मात्र से काम नहीं चलने वाला। आज चार साल, छह साल की बच्चियों से दुष्कर्म हो रहे है आखिर ये सब क्या है? कौनसे समाज का निर्माण कर रहे है हम? दोषियों के खिलाफ कानून कड़ाई से काम करें। हर बच्चा देश का भविष्य है। अगर समय रहते बाल अपराधों पर अंकुश नहीं लगा तो कारवां गुजर जाएंगा और हम देखते रहेंगे। सामाजिक मूल्यों को गिरने से रोकना होगा।

प्रो. मधु शास्त्री

इस दौरान सीपीयू के चांसलर प्रमोद माहेश्वरी ने कहा कि बाल अपराधों की रोकथाम व बाल संरक्षण आज समय की मांग है। आज समाचारों में बाल अपराध की खबरें आती है तो मन विचलित हो उठता है। चिंता होती है कि समाज किस दिशा में जा रहा हैं। बढ़ता अपराध समाज के लिए चिंता का विषय है। दोषियों के लिए कानून सख्त हो। उन्होंने कहा कि शिक्षक होने के नाते मुझे लगता है कि कुछ इस तरह की पॉलीसी ऐसी बने जिससे अपराध रूके और

प्रमोद माहेश्वरी, चांसलर सीपीयू

पीड़ितों का उत्थान हो। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोटा योगेंद्र कुमार पुरोहित ने कहा कि बाल अपराध की रोकथाम के लिए हर संभव कार्य किया जा रहा है। कहा कि 16 की उम्र के बच्चे आज रेप व मर्डर जैसे गंभीर अपराध में लिप्त है। बाल अपराध रोकथाम के लिए हम प्रयासरत है। ऐसे अपराध करने वाले बच्चों की मनोचिकित्सक से जांच करवाई जाती है ताकि उनकी मानसिकता पता चलें। इसके लिए कोटा में कार्य आरंभ किया गया है।

75 से अधिक शोध पत्र पढ़े

सीपीयू के अकादमिक निदेशक डॉ. गुरूदत्त कक्कड़ ने बताया कि दूसरे सत्र में देशभर से आए 75 से ज्यादा शोध पत्र विधि विशेषज्ञों द्वारा पढ़े गए। शोध पत्रों के माध्यम से धरातल पर हो रहे बाल अपराध के कारण व निवारण विस्तृत तरीके से बताए गए। शाम को समापन समारोह का आयोजन हुआ।

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