मिस काॅल से चलेगा खेत का पंप, सोलर एनर्जी से घास कटर

आज तकनीकी युग में शहरी क्षेत्र में प्रत्येक काम तकनीक आधारित है। चाहे गगनचुंबी इमारतों में छत तक जाने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल हो या सुदूर विदेश में बैठकर सीसीटीवी कैमरों से मोबाइल के जरिए घर की निगरानी करना। आज तकनीक से जुड़ी सुविधाओं ने हमारी दिनचर्या को काफी सहज बना दी है, लेकिन अधिकतर तकनीक महंगी होने की वजह से आम आदमी की पहुंच से दूर है। इसके अलावा हमारे गांव आज भी तकनीक के क्षेत्र में पिछड़े हुए हैं। ऐसे में कॅरिअर पाॅइंट यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के नवाचार गांव व किसानों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं। इन तकनीकी माॅडल्स का प्रदर्शन कॅरिअर पाॅइंट यूनिवर्सिटी में आयोजित साइंस एक्जीबिशन में नौ विभागों के स्टूडेंट्स ने किया। सीपीयू के वाइस चासलर डाॅ. डीएन राव ने बताया कि एक्जीबिशन में रखे गए माॅडल्स में अपनाई गई तकनीक काफी किफायती है ताकि आम आदमी इसका उपयोग आसानी से कर सके। संयोजक सीतेश कुमार ने बताया कि एक्जीबिशन में कुल 462 माॅडल प्रदर्शित किए।
मोबाइल से खेती की सिंचाई
ड्युअल टोन मल्टीपल फ्रिक्वेंसी सिस्टम (डीटीएमएफ)। जोकि बड़ा दिलचस्प प्रोजक्ट है, क्योंकि मोबाइल संे जुड़ा है। मिस्ड काॅल करने पर मोटर चलने के साथ खेती की सिंचाई शुरु हो जाती है। एमएससी जूलाॅजी के स्टूडेंट्स विशाल गुप्ता व त्रिलोक बंजारा ने बताया कि उन्होने ऐसा फाॅर्मूला बनाया है जो मोबाइल के जरिए विद्युत उपकरणों को कंट्रोल कर सकता है। मात्र 4 हजार रुपए की लागत से इस सिस्टम को असेंबल करना बहुत आसान है। आॅटो काॅल रिसीवर से युक्त मोबाइल को डीटीएमएफ से जोड़ा जाता है। इससे काॅल करने पर यह इनकोड को डिकाॅड करता है, और एक फिक्स नंबर के बटन को दबाते ही आॅटोमेटिक रिसीवर आॅन हो जाता है। टाइमर की मदद से संबंधित पंप को आॅफ किया जा सकता है।सौर उर्जा से चलेगा कटर
उद्यानों में घास आदि काटने के लिए ग्रास कटर का उपयोग होता है। जोकि पूर्णतया विद्युत उर्जा पर आधारित है। इसके अलावा इसमें मैन पाॅवर भी चाहिए होती है। इसमें बिजली व समय काफी खर्च होता है। इसे ध्यान में रखते हुए सीपीयू के बीटेक इलेक्ट्रिकल ब्रांच के स्टूडेंट्स आशीष नागर, अखिलेश सैनी व निशांत पब्बी ने सोलर ग्रास कटर का प्रोजेक्ट बनाया है। मात्र 3 हजार रुपए लागत का यह ग्रास कटर पूर्णतया सौर उर्जा पर आधरित होगा और इसे भी आसानी से मोबाइल से आॅपरेट किया जा सकेगा। इसमें विशेष तकनीक से सोलर एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदला जाता है। इसमें सौर उर्जा के भंडारण के लिए बैटरी लगाई हुई है।
चावल की भूसी से बनाया ब्लाॅक
सीपीयू के सिविल फोर्थ ईयर बीटेक के स्टूडेंट्स आनंद कुमार, अविनाश पटेल व शुभम कुमार ने कंस्ट्रक्शन में काम आने वाले ब्लाॅक को वेस्ट मैटेरियल से विकसित किया है। इनके प्रोजेक्ट का नाम ‘लाइट वेट ब्लाॅक यूजिंग वेस्ट मैटेरियल’ है। उन्होने बताया कि इन ब्लाॅक का उपयोग पार्टिशन वाॅल में होता है। कोटा जैसे शहरी क्षेत्र में थर्मल की फ्लाई ऐश व कोटा स्टोन की स्लरी जैसे वेस्ट मैटेरियल से इन ब्लाॅक को बनाया जा सकता है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में चाचल की भूसी उपयोग में ली जा सकती है। वर्तमान में बाजार में उपलब्ध ब्लाॅक की कीमत 95 रुपए है जबकि स्टूडेंट्स द्वारा तैयार ब्लाॅक की कीमत मात्र 42 रुपए है। इनकी खासियत है कि यह वजन में काफी हल्के हैं और पानी पर तैरने में भी सक्षम हैं।

किसानों के लिए बनाई साइकिल टिलर
एग्रीकल्चर बीएससी सैकण्ड ईयर की स्टूडेंट्स खान अमरीन, पीयूष गालव, यतीश, साक्षी सिंह व शुभम ने किसानों के लिए उपयोगी प्रोजेक्ट बनाया, जिसका नाम है साइकिल टिलर। बड़े खेतों में गुड़ाई आदि का काम ट्रेक्टर आदि के जरिए होता है, लेकिन छोटी जगहों पर काफी परेशानी आती है। ऐसे में मात्र 4 हजार रुपए की लागत से तैयार साइकिल टिलर का उपयोग छोटे पाॅली हाउस आदि जगहों पर आसानी से किया जा सकता है। इसकी खासियत है कि यह छोटी से छोटी जगह में काम कर सकता है। इसे व्यक्ति खुद हाथ से संचालित कर सकता है। ऐसे में डीजल की जरुरत भी नहीं होती है।

एनर्जी को संतुलित रखेगा ईओन
सीपीयू में बैचलर आॅफ फीजियोथैरेपी फस्र्ट ईयर के स्टूडेंट्स प्रतिमा शेट्टी, सेबी सेजवानी, गौरी खंडेलवाल, यतिका अग्रवाल, नंदीम खान, वजाद खान व मोहम्मद सकलीन ने एक नैचुरल डाइट्री सप्लीमेंट विकसित किया है। जोकि पूर्णतया प्राकृतिक चीजों से बना है। हैल्थ साइंस डिपार्टमेंट के डीन डाॅ. आरएस घोष ने बताया कि आज के वक्त में इस तरह के सप्लीमेंट काफी उपयोगी है। इसे ‘ईओन’ नाम दिया है। इसका सेवन कोई भी उम्र का व्यक्ति कर सकता है। इसकी खासियत है कि इसके सेवन से यदि व्यक्ति का वजन कम है तो उसे ज्यादा और यदि ज्यादा है तो उसे कम कर वजन को संतुलित कर देता है।

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